1 / 10 0 0 05:00 Question 1 अधीनस्थ पार्थक्य की संधियों के अंतर्गत रियासतों की 'विदेश नीति' से संबंधित क्या शर्त थी? A. रियासतें किसी भी देश से स्वतंत्र रूप से संबंध रख सकती थीं यह गलत है, रियासतों की स्वतंत्रता पूरी तरह समाप्त कर दी गई थी। B. रियासतें कंपनी की अनुमति के बिना किसी अन्य शक्ति से राजनीतिक संबंध या संधि नहीं कर सकती थीं यह सही शर्त थी; रियासतों ने अपनी विदेश नीति का पूर्ण समर्पण ब्रिटिश कंपनी को कर दिया था। C. विदेश नीति का संचालन केवल मराठों की सहमति से होना था मराठों के प्रभाव को खत्म करने के लिए ही यह संधियां की गई थीं। D. विदेश नीति का फैसला केवल संयुक्त राजपूत परिषद द्वारा लिया जाना था किसी संयुक्त राजपूत परिषद का कोई प्रावधान नहीं था। Explanation संधि की एक प्रमुख शर्त के अनुसार रियासतों के शासकों ने अपनी विदेश नीति ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को सौंप दी। अब वे कंपनी की पूर्व अनुमति के बिना किसी अन्य शासक, राज्य या विदेशी शक्ति से कोई संधि, पत्राचार या राजनीतिक संबंध नहीं रख सकते थे। Question 2 यदि दो रियासतों के मध्य कोई विवाद उत्पन्न होता, तो संधि के नियमों के अनुसार उसका समाधान कैसे होना था? A. युद्ध के मैदान में सैन्य बल द्वारा संधि के अनुसार रियासतों के आपसी युद्ध पर पूरी तरह रोक लगा दी गई थी। B. ब्रिटिश मध्यस्थता द्वारा दो रियासतों के बीच के किसी भी विवाद का अंतिम फैसला ब्रिटिश मध्यस्थता द्वारा तय किया जाना अनिवार्य था। C. मुगल सम्राट के फैसले द्वारा मुगल सम्राट का इसमें कोई हस्तक्षेप या भूमिका नहीं थी। D. पंचायत या धार्मिक गुरुओं की मध्यस्थता द्वारा मध्यस्थता का अधिकार केवल ब्रिटिश कंपनी के पास था। Explanation अधीनस्थ पार्थक्य की संधियों का एक महत्वपूर्ण प्रावधान यह था कि यदि दो संधिबद्ध रियासतों के बीच कोई क्षेत्रीय या राजनीतिक विवाद होता है, तो वे आपस में युद्ध नहीं करेंगी, बल्कि उसका समाधान ब्रिटिश कंपनी की मध्यस्थता से ही मान्य होगा। Question 3 19वीं शताब्दी की शुरुआत में राजपूताना की प्रशासनिक व आर्थिक व्यवस्था चरमराने का मुख्य कारण क्या था? A. अंग्रेजों द्वारा प्रत्यक्ष सैन्य आक्रमण इस काल में अंग्रेजों ने प्रत्यक्ष आक्रमण नहीं किया, बल्कि अराजकता का लाभ उठाकर संधियां कीं। B. मराठों (होल्कर, सिंधिया) के आक्रमण और अमीर खां पिंडारी की लूटपाट मराठा सरदारों (होल्कर, सिंधिया) के लगातार हमलों और अमीर खां पिंडारी के अनियंत्रित उपद्रव से व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई थी। C. मुगल साम्राज्य का अत्यधिक दबाव 19वीं शताब्दी की शुरुआत तक मुगल साम्राज्य अत्यंत कमजोर हो चुका था और उसका कोई प्रभाव नहीं बचा था। D. रियासतों के बीच आपसी व्यापारिक युद्ध मुख्य संकट बाह्य मराठा आक्रमणकारियों और पिंडारियों की लूटपाट का था, न कि व्यापारिक युद्धों का। Explanation 19वीं शताब्दी के प्रारंभ में मराठा सरदारों (विशेष रूप से होल्कर और सिंधिया) के लगातार आक्रमणों तथा अमीर खां पिंडारी के नेतृत्व में पिंडारियों की अनियंत्रित लूटपाट से राजपूताना के राज्यों की अर्थव्यवस्था और शासन व्यवस्था छिन्न-भिन्न हो गई थी। Question 4 रियासतों द्वारा दिए जाने वाले खिराज की राशि का निर्धारण मुख्य रूप से किस आधार पर किया गया था? A. रियासत के कुल क्षेत्रफल और जनसंख्या के आधार पर क्षेत्रफल नहीं, बल्कि रियासत की आय और मराठा इतिहास को आधार बनाया गया। B. रियासत की औसत वार्षिक आय और पूर्व में मराठों को दिए जाने वाले चौथ/सरदेशमुखी के आधार पर रियासतों द्वारा दिए जाने वाले खिराज की राशि का निर्धारण उस रियासत की औसत आय और मराठों को पहले दी जाने वाली चौथ/सरदेशमुखी को देखकर तय किया गया। C. केवल राजा की व्यक्तिगत संपत्ति के आधार पर राजा की व्यक्तिगत संपत्ति का इसमें कोई लेना-देना नहीं था। D. ब्रिटिश सेना में तैनात सैनिकों की संख्या के आधार पर खिराज का आधार रियासत की वार्षिक आय और मराठा करों का इतिहास था। Explanation खिराज की राशि का निर्धारण करते समय अंग्रेजों ने दो मुख्य बातें ध्यान में रखीं: पहला, रियासत की औसत वार्षिक आय क्या है; और दूसरा, वह रियासत पूर्व में मराठों को 'चौथ' या 'सरदेशमुखी' के रूप में कितनी राशि देती आ रही थी। Question 5 निम्नलिखित में से किन तीन रियासतों को ईस्ट इंडिया कंपनी को खिराज (Tribute) देने से मुक्त रखा गया था (अपवाद थीं)? A. मेवाड़, मारवाड़ और जयपुर इन बड़ी रियासतों पर खिराज देने का भारी दायित्व तय किया गया था। B. बीकानेर, जैसलमेर और करौली बीकानेर, जैसलमेर और करौली रियासतों से खिराज नहीं लिया जाता था। C. कोटा, बूंदी और झालावाड़ हाड़ौती की रियासतों से खिराज लिया जाता था। D. सिरोही, डूंगरपुर और बांसवाड़ा यह सही अपवाद समूह नहीं है। Explanation अधिकांश रियासतों पर खिराज देना अनिवार्य था, लेकिन भौगोलिक स्थिति, आर्थिक कमजोरी या विशेष परिस्थितियों के कारण 'बीकानेर, जैसलमेर और करौली' रियासतों को खिराज से मुक्त रखा गया था। Question 6 मालवा क्षेत्र की रियासतों के लिए ईस्ट इंडिया कंपनी की ओर से मुख्य वार्ताकार कौन था? A. चार्ल्स मेटकॉफ मेटकॉफ मुख्य रूप से राजपूताना और दिल्ली रेजिडेंसी के अंतर्गत आने वाली रियासतों के वार्ताकार थे। B. कर्नल जेम्स टॉड कर्नल टॉड मेवाड़, मारवाड़, हाड़ौती और सिरोही के समन्वयक थे। C. जॉन मैल्कम मालवा क्षेत्र के लिए ब्रिटिश वार्ताकार जॉन मैल्कम थे। D. लॉर्ड कॉर्नवालिस लॉर्ड कॉर्नवालिस का काल 18वीं शताब्दी के उत्तरार्ध का था, वे इस संधि प्रक्रिया से संबद्ध नहीं थे। Explanation राजपूताना के पड़ोसी मालवा क्षेत्र की रियासतों के साथ ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की ओर से संधियों की बातचीत और समझौते का दायित्व जॉन मैल्कम (John Malcolm) को सौंपा गया था। Question 7 राजपूताना की अधिकांश रियासतों के साथ अधीनस्थ पार्थक्य की संधियों का मुख्य वार्ताकार या वास्तुकार किसे माना जाता है? A. कर्नल जेम्स टॉड कर्नल टॉड ने मेवाड़, मारवाड़, हाड़ौती आदि क्षेत्रों में केवल समन्वय का कार्य किया था, वे मुख्य वास्तुकार नहीं थे। B. चार्ल्स मेटकॉफ चार्ल्स मेटकॉफ दिल्ली के तत्कालीन रेजिडेंट थे और उन्होंने ही अधिकांश रियासतों के लिए संधि का मसौदा तैयार किया था। C. जॉन मैल्कम जॉन मैल्कम ने केवल मालवा क्षेत्र की रियासतों के लिए वार्ताकार का कार्य किया था। D. लॉर्ड हेस्टिंग्स लॉर्ड हेस्टिंग्स गवर्नर जनरल थे, जिन्होंने नीति बनाई, लेकिन प्रत्यक्ष वार्ता का कार्य चार्ल्स मेटकॉफ ने किया। Explanation दिल्ली के तत्कालीन रेजिडेंट चार्ल्स मेटकॉफ को इन संधियों की वार्ता का मुख्य वास्तुकार माना जाता है। उन्होंने राजपूताना की अधिकांश रियासतों के साथ संधियों के मसौदे (Drafts) तैयार किए और वार्ताएं संपन्न कीं। Question 8 कर्नल जेम्स टॉड ने किन क्षेत्रों की रियासतों के साथ संधियों के समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी? A. जयपुर, बीकानेर और जैसलमेर कर्नल टॉड का मुख्य ध्यान राजस्थान के पश्चिमी और दक्षिणी क्षेत्रों पर केंद्रित था, न कि केवल उत्तरी/पूर्वी रियासतों पर। B. मेवाड़, मारवाड़, हाड़ौती और सिरोही गद्यांश के अनुसार कर्नल टॉड ने मेवाड़, मारवाड़, हाड़ौती और सिरोही क्षेत्र के लिए संधियों के समन्वय में मुख्य भूमिका निभाई। C. मालवा, निमाड़ और भोपाल मालवा क्षेत्र के लिए जॉन मैल्कम वार्ताकार थे। D. भरतपुर, धौलपुर और करौली इन पूर्वी रियासतों की संधियों का प्रत्यक्ष समन्वय कर्नल टॉड का मुख्य क्षेत्र नहीं था। Explanation कर्नल जेम्स टॉड को ईस्ट इंडिया कंपनी की ओर से मेवाड़, मारवाड़, हाड़ौती (कोटा, बूंदी, झालावाड़) और सिरोही क्षेत्र की रियासतों के साथ संधियों के समन्वय और प्रशासनिक पत्राचार का विशेष प्रभार दिया गया था। Question 9 1817-1823 की अधीनस्थ पार्थक्य की संधियों के समय भारत का गवर्नर जनरल कौन था? A. लॉर्ड वेलेज़ली लॉर्ड वेलेज़ली ने सहायक संधि (Subsidiary Alliance) नीति शुरू की थी, लेकिन अधीनस्थ पार्थक्य की संधियों के समय वे गवर्नर जनरल नहीं थे। B. लॉर्ड हेस्टिंग्स लॉर्ड हेस्टिंग्स (मॉर्क्विस ऑफ हेस्टिंग्स) 1817-1823 के दौरान गवर्नर जनरल थे, जिन्होंने अधीनस्थ पार्थक्य की नीति की शुरुआत की। C. लॉर्ड डलहौजी लॉर्ड डलहौजी की नीति 'व्यपगत का सिद्धांत' (Doctrine of Lapse) थी, जो 1848 के बाद लागू हुई। D. लॉर्ड विलियम बेंटिक लॉर्ड विलियम बेंटिक का कार्यकाल 1828 से 1835 के बीच था, जो इस संधि काल के बाद का है। Explanation 19वीं शताब्दी की शुरुआत में राजपूताना में अराजकता को समाप्त करने और ब्रिटिश प्रभुत्व स्थापित करने के लिए गवर्नर जनरल लॉर्ड हेस्टिंग्स (मॉर्क्विस ऑफ हेस्टिंग्स) ने 'अधीनस्थ पार्थक्य की नीति' (Subordinate Isolation Policy) का सूत्रपात किया। Question 10 अधीनस्थ पार्थक्य की संधियों के तहत 'खिराज' (Tribute) से क्या अभिप्राय था? A. रियासतों द्वारा प्रजा पर लगाया गया नया कर खिराज प्रजा का कर नहीं, बल्कि रियासत द्वारा अंग्रेजों को दी जाने वाली राशि थी। B. ब्रिटिश सुरक्षा के बदले रियासतों द्वारा कंपनी को दिया जाने वाला वार्षिक कर कंपनी द्वारा बाह्य सुरक्षा देने के बदले रियासतें वार्षिक रूप से जो कर देती थीं, उसे खिराज कहा जाता था। C. मराठों को दिया जाने वाला एकमुश्त जुर्माना खिराज अंग्रेजों को दिया जाता था, न कि मराठों को। D. धार्मिक स्थलों के रखरखाव के लिए दिया गया दान खिराज एक अनिवार्य राजनीतिक व सैन्य कर था। Explanation खिराज (Tribute) वह वार्षिक कर था जो राजपूताना की रियासतें ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा दी जाने वाली सुरक्षा और बाह्य आक्रमणों से रक्षा के एवज में कंपनी के कोष में जमा कराने के लिए सहमत हुई थीं। Back Next Submit Quiz Sign Up For Daily Newsletter Be keep up! Get the latest breaking news delivered straight to your inbox. Sign Up I have read and agree to the terms & conditions By signing up, you agree to our Terms of Use and acknowledge the data practices in our Privacy Policy. 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